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"जाग्रत युवा शक्ति ही, राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक हैं।" भारत का इतिहास अनेको युवा क्रान्तिकारियों , संन्यासियों , बलिदानियों और श्रेष्ठ वैज्ञानिकों के उदात्त जीवन की श्रेष्ठ गाथाओं से भरा हुआ हैं।
आज भी भारत का वह युवा शक्ति प्रवाह अवरुद्ध नही हुआ हैं, क्योंकि चन्द्रगमन अभियान प्रणेता श्री राकेश शर्मा, अन्तरिक्ष यात्री, वैज्ञानिक कु. कल्पना चावला, मिसाइल मैन डा. ए.पी.जे. कलाम जैसी महान विभूतियों ने अपने देश भारत का कीर्तिध्वज फहराकर विश्व में भारत माता का गर्व से मस्तक ऊँचा किया हैं। यह हम सभी के प्रेरणाप्रद और अनुकरणीय आदर्श रहेगा। डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (महामहिम पूर्व राष्ट्रपति, मिसाइल मैन, भारतरत्न) महान वैज्ञानिक ने कहा था स्वपन वो नही होते जो सोते हुए देखे जाते हैं। बल्कि स्वपन वे होते हैं जो पूर्ण होने तक चैन की नींद नही आने देते। यही श्रेष्ठ विचार सभी के लिए प्रेरणा प्रद वना रहे। इसी के साथ सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य एवं यशस्वी जीवन के लिए मेरी हार्दिक शुभ कामनायें।
महात्मा अरविंद के अनुसार, " मानव भौतिक जीवन व्यतीत करते हुऐ तथा अन्य मानवों की सेवा करते हुऐ, अपने मानस को अति मानस (super - mind) तथा स्वयं को 'अति मानव ' (superman) में परिवर्तित कर सकता है। आज की परिस्थितियों में, जब हम अपनी प्राचीन सभ्यता , संस्कृति एवं परम्परा भूलकर, भौतिकवादी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं। आज धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागृति।
बाल ज्ञान निकेतन विद्यालय के सभी छात्र - छात्राओं की सम्मानित माताओं को शुभ कामनाओं के साथ स्नेहाशीष युक्त संक्षिप्त विचारो की झाँकी :- माँ सन्तानों के लिए ममता और स्नेह की साक्षात मूरत हैं। अपने पुत्र - पुत्रियों को सफलता की चरम सिमाओं तक ले जाने हेतु साहस भरी सूरत हैं। माँ पहली गुरु हैं। । माँ श्रेष्ठ ज्ञान हैं। माँ सभी प्राणियों के लिये विधाता का श्रेष्ठ वरदान हैं।
"A healthy mind lives in a healthy body" विद्यार्थियों को एक सफल और उपलब्धिपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर होने के लिए उपरोक्त उक्ति को चरितार्थ करना होगा। स्वास्थय का अर्थ, केवल शरीर का रोगमुक्त होना ही नहीं वरन् मन और मस्तिष्क का निर्विकार होना भी आवश्यक है। बाल ज्ञान निकेतन इन्टर कॉलेज में, प्रतिवर्ष निशुल्क स्वास्थय शिविर आयोजित होता रहा है।
बाल ज्ञान निकेतन प्राइमरी स्कूल में हमारा यह मानना हैं कि बच्चों का विकास और सीखना, ऐसे क्रम का अनुसरण करता हैं कि जिससे बाद में बच्चों द्वारा अधिग्रहित क्षमताओं अर्थात कौशल और अवधारणाओं का निर्माण होता हैं। जो बच्चें पहले से जानते हैं और लागू करते हैं जीवन के पहले कुछ वर्षो में लागू करते हैं जीवन विकास ज्यादातर एक पूर्वानुमानित पैटर्न का पालन करते हैं।
भारतीय पौराणिक मान्यताओं और संस्कृतिक विरासतों तथा अवधारणाओं के अनुसार शिक्षा को एक श्रेष्ठ प्रकाश स्तम्भ के समान माना गया हैं। क्यों कि महान शिक्षाविद् वी.एच.यू. के संस्थापक भारतीय संस्कृति के पुरोधा पं. महामना मदनमोहन मालवीय जी द्वारा लिखित श्रेष्ठ सूक्ति "शिक्षा के माध्यम से ही देश व समाज में ज्ञान भक्ति शक्ति संस्कार और चरित्र रूपी अनुशासित शास्वत।
महात्मा अरविंद के अनुसार, " मानव भौतिक जीवन व्यतीत करते हुऐ तथा अन्य मानवों की सेवा करते हुऐ, अपने मानस को अति मानस (super - mind) तथा स्वयं को 'अति मानव ' (superman) में परिवर्तित कर सकता है। आज की परिस्थितियों में, जब हम अपनी प्राचीन सभ्यता , संस्कृति एवं परम्परा भूलकर, भौतिकवादी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं। आज धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागृति।
बाल ज्ञान निकेतन विद्यालय के सभी छात्र - छात्राओं की सम्मानित माताओं को शुभ कामनाओं के साथ स्नेहाशीष युक्त संक्षिप्त विचारो की झाँकी :- माँ सन्तानों के लिए ममता और स्नेह की साक्षात मूरत हैं। अपने पुत्र - पुत्रियों को सफलता की चरम सिमाओं तक ले जाने हेतु साहस भरी सूरत हैं। माँ पहली गुरु हैं। । माँ श्रेष्ठ ज्ञान हैं। माँ सभी प्राणियों के लिये विधाता का श्रेष्ठ वरदान हैं।
"A healthy mind lives in a healthy body" विद्यार्थियों को एक सफल और उपलब्धिपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर होने के लिए उपरोक्त उक्ति को चरितार्थ करना होगा। स्वास्थय का अर्थ, केवल शरीर का रोगमुक्त होना ही नहीं वरन् मन और मस्तिष्क का निर्विकार होना भी आवश्यक है। बाल ज्ञान निकेतन इन्टर कॉलेज में, प्रतिवर्ष निशुल्क स्वास्थय शिविर आयोजित होता रहा है।
बाल ज्ञान निकेतन प्राइमरी स्कूल में हमारा यह मानना हैं कि बच्चों का विकास और सीखना, ऐसे क्रम का अनुसरण करता हैं कि जिससे बाद में बच्चों द्वारा अधिग्रहित क्षमताओं अर्थात कौशल और अवधारणाओं का निर्माण होता हैं। जो बच्चें पहले से जानते हैं और लागू करते हैं जीवन के पहले कुछ वर्षो में लागू करते हैं जीवन विकास ज्यादातर एक पूर्वानुमानित पैटर्न का पालन करते हैं।
भारतीय पौराणिक मान्यताओं और संस्कृतिक विरासतों तथा अवधारणाओं के अनुसार शिक्षा को एक श्रेष्ठ प्रकाश स्तम्भ के समान माना गया हैं। क्यों कि महान शिक्षाविद् वी.एच.यू. के संस्थापक भारतीय संस्कृति के पुरोधा पं. महामना मदनमोहन मालवीय जी द्वारा लिखित श्रेष्ठ सूक्ति "शिक्षा के माध्यम से ही देश व समाज में ज्ञान भक्ति शक्ति संस्कार और चरित्र रूपी अनुशासित शास्वत।
महात्मा अरविंद के अनुसार, " मानव भौतिक जीवन व्यतीत करते हुऐ तथा अन्य मानवों की सेवा करते हुऐ, अपने मानस को अति मानस (super - mind) तथा स्वयं को 'अति मानव ' (superman) में परिवर्तित कर सकता है। आज की परिस्थितियों में, जब हम अपनी प्राचीन सभ्यता , संस्कृति एवं परम्परा भूलकर, भौतिकवादी सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं। आज धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागृति।