प्राईमरी वर्ग प्रधानाचार्य

उजाला परवीन

प्राईमरी वर्ग प्रधानाचार्य का संदेश

बाल ज्ञान निकेतन प्राइमरी स्कूल में हमारा यह मानना हैं कि बच्चों का विकास और सीखना, ऐसे क्रम का अनुसरण करता हैं कि जिससे बाद में बच्चों द्वारा अधिग्रहित क्षमताओं अर्थात कौशल और अवधारणाओं का निर्माण होता हैं। जो बच्चें पहले से जानते हैं, उसी को दैनिक व्यवहार में लाकर अपने जीवन में भी अपनाते है। इसलिए विद्यालय में कराई गई हर गतिविधि बच्चो के भविष्य में होने वाले विकास के लिए सहायक होती हैं।

हमारा यह मानना हैं कि बाल विकास व शिक्षण की दृष्टि से, हर बच्चा अपनी एक व्यक्तिगत भिन्नता लेकर पैदा होता हैं । कोई भी दो बच्चे, यहाँ तक कि एक परिवार के भीतर भी, दोनो समान नहीं हो सकते। प्रत्येक बच्चें की प्रगति और विकास का एक तरीका और समय होता हैं और साथ ही सीखने की व्यक्तिगत शैली भी उनकी अलग - अलग होती हैं। प्रत्येक में व्यक्तिगत विशिष्टता और ताकत होती हैं।

बच्चें समग्र रूप से विकसित होते हैं और अनुभवात्मक शिक्षण से लाभान्वित होते हैं। इसलिए हमारा मानना हैं कि बच्चों के स्किल डेवलपमेंट के लिए इन्द्रियों अर्थात स्पर्श, स्वाद, गन्ध और हस्तकौशल का उपयोग करके सक्रिय खोज के माध्यम से सिखाना आवश्यक हैं।

सीखने की प्रक्रिया जन्म के समय से ही प्रारम्भ होती हैं। जन्म के बाद से बच्चें मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं। वे अपनी सभी इन्द्रियों की प्रेरणा और प्रोत्साहन के माध्यम से सीखना प्रारम्भ करते हैं। विद्यालय में हमारा प्रयास रहता हैं। बच्चो को प्रारम्भिक वर्षों में आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए, जिससे लम्बे समय में होने वाले नुकसान को रोका जाए।

बाल ज्ञान निकेतन प्राइमरी स्कूल में निम्न बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं।
1. हर बच्चें का समुचित विकास।
2.बच्चों में जिज्ञासा व सीखने की इच्छा को प्रोत्साहन देना।
3. बच्चों का सहज खेल, अन्वेषण, प्रयोग व हस्तकौशल माध्यम के द्वारा, सीखने के सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।